
H160 Vivekvani (विवेकवाणी : स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाएँ)
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विभिन्न विषयों पर स्वामी विवेकानन्दजी के विचार इस पुस्तक में समाविष्ट हुए हैं। इस ग्रन्थ को हम स्वामीजी के विचारों का प्रतिनिधि-ग्रन्थ कह सकते हैं। स्वामी विवेकानन्द जैसे महापुरुष इस धरातल पर सैकड़ों वर्षों बाद ही अवतीर्ण होते हैं। इस बार स्वामीजी का आगमन समस्त मानव जाति के लिए हुआ है, परन्तु विशेष रूप से यह भारत के लिए अत्यन्त कल्याणकारी है। भगवान श्रीरामकृष्ण देव के संस्पर्श में आकर स्वामीजी ने निर्विकल्प समाधि द्वारा सत्य प्राप्ति के पश्चात् लोकहित का कार्य शुरु किया। अत: उनकी वाणी में हमें दैवी शक्ति तथा ओज का अनुभव होता है। स्वामी विवेकानन्दजी ने अमेरिका, इग्लैण्ड तथा भारत आदि देशों में जो विभिन्न व्याख्यान दिये तथा भिन्न भिन्न समयों पर विशिष्ट जनसमुदाय के सम्मुख अपने विचार प्रकट किये, उन्हें ही प्रस्तुत पुस्तक में हमने एकत्रित किया है। यह ग्रन्थ स्वामी विवेकानन्दजी के उदात्त, ओजस्वी, प्रेरणादायी विचारों के ‘संदर्भ ग्रन्थ’ के रूप में भी लाभप्रद हो सकता है। इन विचारों से भारतीय जनमानस का विशेष उपकार हुआ है। इसमें ऐसा एक भी क्षेत्र अछूता नहीं रहा है — जिस पर स्वामीजी ने अपने विचार प्रकट न किये हों। अत: इन विचारों की सहायता से हमारे युवा वर्ग के सामने उन्होंने एक चुनौती प्रस्तुत की है, जिससे हमारा वैयक्तिक, सामाजिक तथा राष्ट्रीय जीवन एक नये सुदृढ़ आधार पर खड़ा रह सकेगा।


