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‘वर्तमान भारत’ बंगला का एक मौलिक ग्रंथ है। इस पुस्तक में उन्होंने भारतवर्ष के प्राचीन गौरव का सुन्दर चित्र खींचा है तथा उन बातों को भी सम्मुख रखा है जिनके कारण इस राष्ट्र की अवनति हुई। इस पुस्तक में स्वामीजी ने बड़ी विद्वत्ता के साथ भारतवर्ष के राष्ट्रीय ध्येयों की विवेचना की है तथा इस बात पर जोर दिया है कि यदि भारतवासियों को अपने राष्ट्र का पुनरुत्थान वांछित है तो उन्हें यह यत्न करना चाहिए कि उनमें नि:स्वार्थ सेवाभाव तथा आदर्श चारित्र्य आ जाए। यह पुस्तक उनके हित में विशेष लाभदायक सिद्ध होगी जो राष्ट्र के पुनरुत्थान तथा सामाजिक सेवा में लगे हुए हैं।


